जीवन *गणित* है,

सांसें *घटती* है, अनुभव *जुड़ते* हैं..
अलग अलग *कोष्ठकों* में बंद हम, बुनते रहते है *समीकरण*.. लगाते रहते हैं, *गुणा-भाग*
जबकि जीवन का अंतिम सत्य

*शून्य है*।।

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