​उनका 💖भी 💖कभी 💖हम💖 दीदार 💖करते 💖है

उनका 💖भी 💖कभी 💖हम💖 दीदार 💖करते 💖है 💖उनसे 💖भी 💖कभी💖 हम💖 प्यार💖 करते💖 है 💖क्या💖 करे 💖जो💖 उनको💖 हमारी💖 जरुरत💖 न 💖थी💖 पर💖 फिर 💖भी💖 हम💖 उनका 💖इंतज़ार💖 करते 💖है
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तेरी मौजूदगी का अहसास

तेरी मौजूदगी का अहसास...

तू हमसफ़र तू हमडगर तू हमराज नजर आता है,
मेरी अधूरी सी जिंदगी का ख्वाब नजर आता है,
कैसी उदास है जिंदगी… बिन तेरे… हर लम्हा,
मेरे हर लम्हे में तेरी मौजूदगी का अहसास नजर आता है।

छीन ली हमारी मोहब्बत

छीन ली हमारी मोहब्बत…

खामोश फ़िज़ा थी कोई साया न था,
इस शहर में मुझसा कोई आया न था,
किसी ज़ुल्म ने छीन ली हम से हमारी मोहब्बत,
हमने तो किसी का दिल दुखाया न था।

फिर पा न सकोगे

फिर पा न सकोगे…

खोकर हमें फिर पा न सकोगे,
जहाँ हम होंगे वह आ न सकोगे,
हरपल हमें महसूस तो करोगे लेकिन
पर हम होंगे वहां जहाँ से
हमें फिर बुला न सकोगे।

अब तो आ जाइये…

अब तो आ जाइये…

शाम है बुझी बुझी वक्त है खफा खफा,
कुछ हंसीं यादें हैं कुछ भरी सी आँखें हैं,
कह रही है मेरी ये तरसती नजर,
अब तो आ जाइये अब न तड़पाइये।

हम ठहर भी जायेंगे राह-ए-जिंदगी में
तुम जो पास आने का इशारा करो,
मुँह को फेरे हुए मेरे तकदीर सी,
यूँ न चले जाइये अब तो आ जाइये।

मैं औऱ मेरी तनहाई

*🥃 मैं औऱ मेरी तनहाई,*

*अक्सर ये बाते करते है..*

*ज्यादा पीऊं या कम,*

*व्हिस्की पीऊं या रम।*
*या फिर तोबा कर लूं..*

*कुछ तो अच्छा कर लूं।*

*हर सुबह तोबा हो जाती है,*

*शाम होते होते फिर याद आती है।*

*क्या रखा है जीने में, असल मजा है पीने में।*
*फिर ढक्कन खुल जाता है,*

*फिर नामुराद जिंदगी का मजा आता है।*

*रात गहराती है,*

*मस्ती आती है।*

*कुछ पीता हूं,*

*कुछ छलकाता हूं।*
*कई बार पीते पीते,*

*लुढ़क जाता हूं।*

*फिर वही सुबह,*

*फिर वही सोच।*

*क्या रखा है पीने में,*

*ये जीना भी है कोई जीने में!*

*सुबह कुछ औऱ,*

*शाम को कुछ औऱ।*
*थोड़ा गम मिला तो घबरा के पी गए,*

*थोड़ी ख़ुशी मिली तो मिला के पी गए,*

*यूँ तो हमें न थी ये पीने की आदत…*

*शराब को तनहा देखा तो तरस खा के पी गए।*
*मधुशाला*